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    न्यूज़ बुलेटिन




    बिलासपुर जिले के आदिवासी बाहुल्य विकासखण्ड मरवाही के दूरस्थ ग्राम गुल्लीडांड़ में बनाया गया आदर्श गौठान गांव के आर्थिक गतिविधि का केन्द्र बनेगा। इसकी शुरूआत हो चुकी है। गांव की महिला स्व-सहायता समूह द्वारा निर्मित सीमेंट, खंभों का उपयोग गौठान के फेंसिंग के लिये किया गया है। गौठान में आने वाले पशुओं के गोबर से पंचगव्य बनाने का कार्य भी इस समूह द्वारा किया जायेगा। जिसकी बिक्री से उनकी आय होगी। 
        ग्राम गुल्लीडांड़ में 6.5 एकड़ क्षेत्र में आदर्श गौठान बनाया गया है। जिसके पास ही ढाई एकड़ क्षेत्र में चारागाह विकसित किया जा रहा है। जहां गौठान में आने वाले पशुओं को हरा चारा मिलेगा। चारागाह के एक एकड़ क्षेत्र में हाइब्रिड नेपियर घास लगाया गया है। यह पशुओं के लिये उत्तम चारा है। बरसात के दिनों डेढ़ एकड़ क्षेत्र में चारे के रूप में उपयोग किया जाने वाला मक्का लगाया जायेगा। 

    गांव में 625 पशु हैं, गौठान में हर दिन लगभग 450 पशुओं के आने की संभावना को ध्यान में रखते हुए 13 कोटना और 25 मचान बनाये गये हैं। मचान के ऊपर पैरा संग्रहण किया जा रहा है। गांव वाले पैरा स्वेच्छा से दान कर रहे हैं। मचान में पैरा रखने से बारिश में भी यह पशुओं के खाने लायक रहेगा, साथ ही उनके बैठने के लिये छायादार जगह भी उपलब्ध रहेगा। जल और पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से तैयार इस आदर्श गौठान के बाहर चारों ओर सीपीटी कार्य किया गया है। जिसमें डेढ़ मीटर गड्ढे बनाये गये हैं। इन गड्ढों में वर्षा का पानी जमा होगा, जिससे क्षेत्र का जलस्तर बढ़ेगा और पशुओं के लिये पानी की समस्या नहीं होगी। गौठान के अंदर भी जल संग्रहण और गोबर से कम्पोस्ट खाद बनाने के लिये संरचना तैयार की गई है। दो बोर खनन किये गये हैं और 7 टंकियां बनाई गयी है, जिसमें पशुओं के लिये पीने का पानी भरा रहता है। गौठान के चारों ओर 200 गड्ढे खोदकर वृक्षारोपण की तैयारी कर ली गई है। ये पौधे बड़े होकर गौठान के फेंसिंग का कार्य करेंगे। गौठान में दो वर्मी कम्पोस्ट टांका और पांच ग्रीन बकेट बनाये गये हैं, जहां गौठान से निकलने वाले मिट्टी, गोबर, पत्ते डाले जायंेगे, जो खाद बनेगा। 

    पशुपालन विभाग द्वारा दो अजोला टैंक बनाये गये हैं। जहां अजोला चारे का उत्पादन कर पशुओं को प्रोटीन सप्लीमेंट के रूप में उपलब्ध कराया जायेगा। गौठान में दो चरवाहे भी अपनी सेवायंे दे रहे हैं। यहां पशुओं का टीकाकरण और बीमारी में उनके उपचार की भी व्यवस्था है। जिसके लिये ट्रेविस (कटघरा) स्थापित किया गया है। 

    गौठान के संपूर्ण व्यवस्था और देखरेख के लिये गांव के सरपंच की अध्यक्षता में समिति बनाई गई है। गौठान में पूरे गांव के पशुओं को एक साथ रखने की क्षमता है। गांव के पशु इधर-उधर घूमते और खेत की फसलों को नुकसान भी पहुंचाते थे। क्योंकि गरीब किसानों और ग्रामीणों के पास अपने पशुओं को रखने की व्यवस्था नहीं थी। अब गौठान के बनने से पशुओं के लिये सुविधा के साथ ही साथ ग्रामीणों को भी बड़ी सुविधा मिली है।


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